Delhi Violence: दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार का असर, गुनहगारों की धरपकड़ शुरू


दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार लगने के बाद दिल्ली पुलिस की चाल बदलती नजर आ रही है. गुरुवार को पुलिस ने अचानक कई विशेष टीम बनाकर कार्रवाई शुरू कर दी है. अब पुलिस की कई टीम दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आरोपियों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ छापामारी कर रही है.
दंगाइयों को पकड़ने के लिए सिविल पुलिस, स्पेशल सेल और अपराध शाखा के अफसरों और जवानों को अलग-अलग टीम में शामिल किया गया है. इसकी पुष्टि दिल्ली पुलिस के एक आला अधिकारी ने की है. एडिश्नल पुलिस कमिश्नर स्तर के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, "यूं तो हिंसा में शामिल तमाम वांछितों की तलाश में टीमें अलग-अलग संभावित स्थानों पर छापे मार रही हैं, मगर सबसे पहले हम एक निगम पार्षद की तलाश कर रहे हैं, जो सुर्खियों में आने के बाद से गायब है."
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तैनात सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) ने कहा, "हमारा काफी स्टाफ उस गुरु तेग बहादुर अस्पताल में व्यस्त है, जहां कई घायल भर्ती हैं. घायलों में से कई की मौत हो चुकी है. कुछ घायलों को मध्य दिल्ली जिले में स्थित लोकनायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल में दाखिल कराया गया है. दोनों अस्पतालों में पुलिस स्टाफ उत्तर पूर्वी दिल्ली जिले का ही व्यस्त है. दोनों अस्पतालों से आ रहीं खबरों से पता चल रहा है कि अब तक करीब 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. पोस्टमॉर्टम कराने की जिम्मेदारी भी पुलिस की है."
हिंसाग्रस्त भजनपुरा और जाफराबाद में मंगलवार को तैनात रहे डीसीपी स्तर के एक अधिकारी के मुताबिक, "पुलिस की टीमें आईबी स्टाफ अंकित शर्मा की हत्या में संदिग्ध एक निगम पार्षद की भी तलाश में है, ताकि उससे पूछताछ करके हकीकत मालूम की जा सके." अंकित शर्मा के पिता रविंद्र कुमार शर्मा ने भी कथित रूप से फरार पार्षद का नाम बेटे के कातिल के रूप में लिया था.
पीड़ितों का कहना है कि दिल्ली पुलिस हिंसाग्रस्त इलाकों में शांति बनाए रखने में व्यस्त होने का बहाना भले ही करे, लेकिन हकीकत यह है कि हाई कोर्ट की फटकार के बाद ही पुलिस हरकत में आई है. अगर पुलिस पहले ही अपनी जिम्मेदारी निभाती तो गुरुवार दोपहर तक हिंसा में 34 लोग ना मारे जाते. दिल्ली का माहौल शांत और खुशगवार होता.









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